.रक्षा बन्धनके शुभ उपलक्ष्यमे सम्पूर्ण भाई-बहिनके ढेर रास शुभ कामना ! एवम् एहिपर समर्पित विन्देश्वर ठाकुर जी केँ ई कविता 


रक्षाबन्धन [कविता] 

भाई-बहिनक प्रेम भरल छै 
लिअ ने एकरा अर्थ अनेक 
एक दिन ला' सालमे आबए
तें त छै ई पर्व बिशेष । 

थाल सजल छै लड्डु रखल छै 
लाल चन्दनसँ माथ रङ्गल छै 
हर्ष-उल्लासक बाढि आबि गेल 
हाथमे स्नेहक डोर बन्हल छै । 

चारुदिस गुन्जैय गीत 
भाए-बहिनक रीत आ प्रीत 
माँ अम्बे सँ करथि प्रार्थना 
होए भैयाके जीते जीत । 

नीक पथ रोजू यौ भैया 
बढतै हमरो आत्मविश्वास 
रक्षा करब देश,समाजक 
रखनेछी बस इहे आस । 

अहाँ हमर आँखिक तारा 
छी हम बहिन अहाँक दुलार 
शत्रुके चङ्गुलस करब 
सद्खनि अपन भूमि उद्धार । 

बाट जोहब हम एहि दिनके 
रहत जाँधरि ठोठमे प्राण 
रक्षाबन्धन जगमग करतै 
भैया जियत सालो साल । 

#विन्देश्वर_ठाकुर 
१५/८/२०१५
छवि : #प्रीति & #प्रीन्स.
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