#करू_मन_मिथिला_के_जयकार 👏




✍👤 डॉ. संजीत झा सरस

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करू मन मिथिला के जयकार !
चिन्तन नव नव शक्ति सृजन के
हृदय सिनेह अम्बार ,
तन मन तलफत दर्शन  को तव
प्रणति पुष्प स्वीकार ,
करू मन मिथिला के जयकार !!१।।

वीरप्रसविनी मातृधरा छी
शास्त्रसमुद्भव दर्शन सार ।
ममतामयी आँचल पसरल अछि
पूतक प्रिय आसार ।
करू मन मिथिला के जयकार !।२।।

भगवति स्वयं जतय निकलल छथि
धरागर्भ स लय अवतार ।
भू योगक मात्रक ई महिमा
फुजहि स्वर्ग वैकुण्ठक द्वार ।
करू मन मिथिला के जयकार !।३।।

 याचना रहित अयाची जतय
मण्डन छल शास्त्रक अवतार ।
वाचस्पति सन दिव्य तपस्वी 
सुरगुरुसुत के शिक्षाकार ।
गौतम कणाद ओ न्याय शास्त्र केर
नाविक गंगेशक  पतवार ।
तपोलीन तप तपथि तपस्वी
तृणवत तृष्णा तृप्त आचार ।
करू मन मिथिला के जयकार।।४।।

जन मन जतय आनन्दित सदिखन
लोभ मोह स रहित विचार ।
आत्मतत्व अवलम्बित जीवन
यद्यपि गार्हस्थ्य कैल स्वीकार ।
मैथिल मन मिथिले टा आँगन 
मिथिलाक महिमा अपरम्पार ।
माँ मिथिले ! अहीं छी अन्त: में
सरस प्रणाम करू स्वीकार ।
करू मन मिथिला के जयकार ।।५।।

            ✍©डॉ. संजीत झा सरस
                  (०७/०७/२०१७)

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