पूरा दुनियाँ भर नारीकेँ एहेन श्राप देने छेल युधिष्ठिर, आखिर किया?

अशोक कुमार सहनी, अपन मिथिला / भादौ- १३ -: ई प्रसंग महाभारतकेँ अछि। जब अर्जुन अंगराज कर्णके वध केलक तब पाण्डवसभ'के माता (मैया) कर्णके लाश देख के ओकर मृत्युके कान लागल  । अपन मैया के कर्ण शव आगु कनैत  देखके युधिष्ठिर कुन्तीके प्रश्न केलक, ‘मैया हमरसभके दुश्मन के मृत्यु भेल अछि किया नीर भहारहल छि?'

तब कुन्ती युधिष्ठिरसे कहलक, ‘कर्ण तोहर दुश्मन नै । बड़का भैया छौ ।’ आ युधिष्ठिरके कर्ण'क जन्मबारे पूरा कहानी सुनाबैत सम्झेलक ।

ई कथन सुनीके युधिष्ठिर बहुत दुःखी भेल। उ अपन मैया कुन्तीसे कहलक एतेक बड़का गप्प छुपा के हमरासभ से बड़का भैया हत्या के दोसी बना देलक कहित बहुत गुशा भेल।

तब युधिष्ठिर समस्त नारी जातिके श्राप दैत कहलक, ‘हम आयसे समस्त नारी जातिके श्राप  दै छी कि अब उ सभ चाहै तैयो अपन मन'क भित्र कोनो गप्प नुका के नै राखि सकै ।’ जनश्रुति अछि कि धर्मराज युधिष्ठिरके एहि श्रापके कारण नारीसभ अखुनो तक सेहो अपन मन'कभित्र कोनो रशस्य गप्प नुकब  नै सकै छैथ  ।


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