विन शिक्षाक जिनगी भेल नर्क समान


✍👤 सरोज कुमार मण्डल 


१)  हमहुँ रहितो जाउ वेटा पैडलीख पैबतो ज्ञान ।
     विन शिक्षाक जिनगी भेल नर्क समान ।।
 दिन वितैय कैरते धैरते घरअँगनाक काज ।
 वेटीसबके बोझ बनल केहेन ई समाज ।।
 वेटीपडलास घटत नय सान ............
    एकै कोइखके जनमल हमहुँ तैयो किय भेदभाव ।
    बेटास कमनय बेटी कियक बुझैनय सोभाव ।।
    बेटीय सँ भेटल छैत ई दुनियाके समान ...............
 बिन्ती करै छि  सुनुयो बाबु ।
 छौइड हसुवा बोरा बडे दिय आगु ।।
 हमरो हसबमे खलखल हसैत भगवान .........
    हमहुँ रहितो जाउ वेटा पैडलीख पैबतो ज्ञान ।
    विन शिक्षाक जिनगी भेल नर्क समान ।।

 २) कुहु–कुहु कुइली बाजे काका करे कौआ ।
    चुप–चुप रे बौआ चुप–चुप रे बौआ ।।
     चाँद सन मुह तोहर घुमरल घुमरल केस रे ।
 बाबु तोहर बड कमौआ धेने छौ परदेश रे ।।
 मय तोहर घरमे बौआ भेलो असगरुवा, चुुप ................
   तोहर रुप देखैले आस लगौने नानी रे ।
   तोरे खातीर बनाके रखनय १० भैरके चानी रे ।।
   नाना तोहर बड कन्जुस नुकाक रखनय ढौआ रे, चुप–चुप ..........
   बुढिया दादी हरदम खुर–खुर करो बारी झारी रे ।
 काकी तोहर दिनमे बदलौ १० टा नबका सारी रे ।।
 काका तोहर कारी केसमे लगबौ तेल गमकौआ, चुप–चुप रे .............
   कुहु–कुहु कुइली बाजे काका करे कौआ ।
   चुप–चुप रे बौआ चुप–चुप रे बौआ ।।
Rj सरोज कुमार मण्डल जी

 रचनाकारः– सरोज कुमार मण्डल 
    पपुलर एफ.एम (सुनसरी)


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