🙏🌹रूप देखल हम कैलाश🌹🙏

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विद्वान  जगतक  बड्ड  पैघ नाम
मोन  बसल   छनि  अरेड गाम
खुयेलाह हमरा खूब आइ आम
नैं  लागल  हमरा  एकों  छदाम ॥१॥
     आमक  भोजक  इ जुनि  पूछूँ 
     कतेक प्रकारक छल विन्यास 
     थारी सजल छल आम राखल छल
     काटि   काटि  दैथि   भाइ   कैलाश ॥२॥
कूरि  लागल पेट  भर  आयल
आमक  लागल  दू   टा   हिस
केलाह बेईमानी भाइ हमरा स
सबटा  बढैलाह ओ हमरे दिस ॥३॥
          अग्रज  हमर ओ  हम  उन्नीस
          हमरा ऊपर पड़लाह ओ बीस
          की   कहूँ   कतेक   हम  कहूँ
          अनुज होयबाक  भेटल टीस ॥४॥
अनुज सरस त मॉछे तिरपित
बिन  हुनका  मोन  हमर तीत 
ओ ज रहैतथि अहि  भोज मे
हमहूँ देखैताहूँ अग्रज के कृत ॥५॥
        ज   रहैतथि  आइ   महेश   भाइ 
        त  कैलाशो    पर     ओ     भारी
        भाइ  कैलाश  केर  अधिकार  स
        निकलि बनिताहूँ सुच्चा नोतहारी ॥६॥
जे कहैय छी सरिपाहूँ कहैय छी 
नैं   कोनो   इ   फुँसि   परिहास 
ऑखि   भरल  आइ  नोर  हमर
देखि    उदगार   भाइ   कैलाश ॥७॥
       कोन  जनम के  बनल ओ  बन्धन 
       कोन   जनम   के    हमर   प्रयास
       नित दिन भोरे फ़ोन अबैयत अछि
       भाइ    जगाबथि   नव  नव  आश ॥८॥



निश्छल निर्मोह बेबहार देखि
उद्वेग   उठल  आइ  अन्तर्नाद
अग्रज रूप भाव अति सिनेही
हिया  जुड़ल  करैयत  अह्लाद ॥९॥
    महेश कैलाश संग मणि सरस
    सबदिन  भेटय  नव   नव  रस
    दु:ख सुख मे एक दोसर के भागी
    स्वीकार करू  हमर सिनेह  सहर्ष  ॥१०॥
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-मणि'आमारूपी'            ०७.०८.२०१७
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