नेना-भूटकाक मित्र : बाल-बन्धु


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मैथिलीक नव बाल पत्रिका "बाल-बन्धु"केँ धिया-पूता खूबे पसंद क' रहल अछि. एक दिस जतए एकर आकर्षक मुखपृष्ठ सहजहिं नेना-भूटका कें अपना दिस खींचि रहल अछि त' दोसर दिस एकर विषय-वस्तुक छनौट मैथिलीभाषी पाठककें आकर्षित करैत देखि रहलौ अछि. सहज स्वर मे कही त' कहबा मे कनियो असोकर्य नै जे "बाल-बन्धु"क पहिले अंक मैथिली पाठक वर्गक मन-मस्तिष्कमे सफल छाप छोड़ैत देखल जा रहल अछि. एहि लेल नवारंभ सहित संपादक मंडल कें अनेकानेक बधाई.


        हमर मंतव्य अछि जे ज' मैथिलीक हरिया रहल फसलि भविष्यमे सेहो लहलहाइत देख' चाहै छी त' आबै बला पीढ़ी अर्थात् अपन बाल-बच्चाकें मैथिली स' परिचय कराएब नितांत आवश्यक अछि. यएह क्रममे हम अपन इसकूल "ज्योत्स्ना आदर्श शिक्षालय" केर धरि दू दर्जन शिक्षार्थी बीच आइ "बाल-बन्धु" वितरित कएल. सभ समुदाय ओ सम्प्रदायक बौआ-बूच्ची अपन एहि नव मित्रक संग पाबि आह्लादित छल. अधिकांशत: विद्यार्थी एकर नियमित पाठक बनबाक गप्प करैत देखल गेल. एतबहि नै, बच्चा सभहक उत्साह देखि लगैए जे एहि पत्रिकाक अगिला अंकक संग हमर इसकूलकें विद्यार्थी सभहक रचना सेहो अपने लोकनि धरि पहुंचत, त' आश्चर्य नै.
      तखन आस एतबहि जे अपने लोकनि सेहो अपन नेना-भूटकाक लेल "बाल-बन्धु" कीनि मैथिलीकें बखारी भरैत पत्रिकाकें दीर्घजीवी बनाबै मे सहयोग करब.

छवि- अपन नव मित्रक संग ज्योत्स्ना आदर्श शिक्षालयक शिक्षार्थी

साभार ✍👤 अक्षय आनन्द सन्नी 

( नॉट -पहिल अंक सभ बिक चुकल खबैर अछि )

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