मीत लंगोटिया
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कृष्ण कहू की कहू सुदामा
थिकहुं परम मोर मीत हे
हम वीणा केर तार अहाँ छी
हमर सुर साजल संगीत हे।
मुरली संगहि संग लकुटिया
एहि मर्म केर भेद के बूझथि
आमक गाछी दूनू लेल मधुवन
जाहि कोयली गाबय गीत हे।
दूर बसै छी हृदय रहै छी
प्राण साँस केर बान्हल डोरी
नेनपन दिवस संग संग बीतल
मोन ओ निश्छल प्रीत हे।
चाहल जीवन संग संग रहितहुं
मुदा समय की एक रहै छै
रौद आ छाहरि जीवन मे लागल
अछि बनल जगत केर रीत हे।
प्रेमक रोपल आंकुर भेल गाछ
ओकरे छाहरि एखनहुं हेरी
जीवन बाट मे आकुल होई त'
मीत वचन भेल शीत हे।
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  "मित्रता दिवसक शुभकामना।"
   :---- राजेश मोहन झा 'गुंजन'॥

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