🌹सजनी
सजनी


.✍👤प्रणव मिश्रा (गोपाल)

आबैत आहाँकऽ याद यै सजनी
सदिखन आहाँक बाद यै सजनी

फुल सन कोमल हमर मोन पर
भेल आहाँ कय राज यै सजनी

 छुटे नहि कखनहु संग अपन
करैत हम फरियाद यै सजनी

भय नहिं जाय कहीं दंगा गांव मऽ
एहेन आहाँकऽ अंदाज यै सजनी

सुन्नर तऽ बड़ बड़ देखलहुँ हम
भेल आहीं पर नाज यै सजनी

आनब आहिं कय घर हम अपन
निभाबैत सबटा रिवाज यै सजनी

एको छन नहि बिसरैत आहाँ कय
रहि गोवा या हैदराबाद यै सजनी

कखनहुँ तऽ आहाँ हंटू मोन सऽ
कोना करब हम काज यै सजनी

छुटी गेल जँ कहिं संग आहाँकऽ
भय जेब हम बर्बाद यै सजनी

✍pranav mishra

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