#हमर_प्राण_हमर_सब_किछु

✍👤Priyaranjan Jha 'दड़िमा'
अहाँ कोनो
बच्चा के पोहलाब' बला
ने चरिअनिया चॉकलेट
ने हमर गामक मेला के
सतरंगा फूक्का
जकरा देखिते 
खुशी सँ झूमि उठी हम

अहाँ सिम्मरक गाछ पर बैसल
कुहकैत कोइलीक
मधु मातल बोलियो नहि 
जकरा सुनिते
ह'म गुणगाणाए लागी
मधुर प्रेम गीत

नै अहाँ,
वसंतक अधखिलाएल
रंग-बिरंगा पुष्पगुच्छ 
जे भौंरा बनि
रसपान करबाक हो 
प्रबल इच्छा

अहाँ हमर प्यासल हिया लेल
एक गिलास शीतल जल छी
जेठक दुपहरिया मे
ह'म थाकल बटोही,अहाँ वटवृक्षक छाहरि
गामक निर्जन बाध मे
एकटा छोट-छिन फूसक घर छी
कतेको जिनगीक प्राणदायिनी
नेहियाएल साओनक बुन्न सन
जन्मदिवस पर प्रियतमक देलहा
सहेजल उपहार छी

मुदा तय्यो,
अहाँ के देखिक'
धनकुटिया मशीन जकाँ
नहि धड़कैत अछि धड़कन
दम्माक रोगी जेना
स्वांस नहि होयत अछि
उप्पर नीच्चा
हँ,अहाँ ल'ग रहै छी
त' हिया धड़कैत अछि 
पुरा बहत्तर बेर
स्वांस आबैत-जाइत रहैए
अपन मद्धिम लय मे
ओना अहाँक संग नहि रहला सँ
रत्ति भरि नहि पड़ैए फरक
मुदा सदिखन अहाँक संग रहनाइ 
हमर परम सौभाग्य थिक।

तृप्ति यदि जीवनक
सब सँ सुन्नर अनुभूति छै
त' अहाँ हमरा तृप्त करै छी
किन्तु कर्मक कादो मे
फँसल रहबाक कारण
अहाँ के दिन-राति
याइद कएनाइ असंभव
मुदा अहाँ बिनु जीनाइ सेहो असंभव
बस एतबे कहबाक अछि
अहाँक पान-सन ठहठह
ठोर पर पसरलल 
मनमोहिनी मुस्कि
हमर प्राण,हमर सभ किछु।

✍👤Priyaranjan Jha 'दड़िमा'

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