सन्दर्भ- धोती/ साड़ीनामा 


         ✍ डॉ.अखिलेश झा   ___________________


  कोनो समाज अपन पहिचान आ अस्तित्वक लेल कालखंडमे विभिन्न सांकेतिक आयोजन अथवा प्रयास करैत अछि। जाहिसँ अपन भाषा,संस्कृति,भेष-भूषा, समस्या....आदि पर समाजक धियान केंद्रित कयल जा सकय(1730इ.मे राजस्थानके खेजारी गाममे भेल"चिपको आंदोलन" एकटा नीक उदहारण बुझायत अछि जाहिमे वन संरक्षण के ओहि क्षेत्रमे महत्व तथा राजनितिक मुद्दा बनाओल गेल)। ताहि क्रममे हमरा बुझना जायत अछिजे अखन चलन चलतीमे आयल धोतीनामा/साड़ीनामा थीक। अहि धोतीनामा/साड़ीनामासँ अपन भेष-भूषासँ सभक धियान केंद्रित करबाक एकटा छोट सन प्रयास थीक। एकर इ अर्थ नहि जे सब मैथिल, हरदम धोती पहिरैत छथि अथवा धोती अलावा किछु पहिरनाय गैर मैथिलक पहिचान।एहन सांकेतिक क्रिया-कलापक इहो अर्थ नहि जे एकर अलावा अन्य समस्या अहि समाजमे विद्यमान नहि।


               कोनो एकटा पक्षके उजागर केनाय दोसर पक्षक अवहेलना नहि थीक।

      मिथिलामे अनेक समस्या अछि(जेना गरीबी,बेरोजगारी,कखनो बाढ़ि कखनो रौदी, मातृभाषामे शिक्षक अभाव,मिथिला के राजनितिक अस्तित्व......आदि)। अहि सब समस्या के संबोधित करैत समय-समय पर क्रियाकलाप आवश्यक।
कतौ-कतौ अहि काज पर(धोतीनामा/साड़ीनामा) चर्चा देखलहुँ जे एकरा पब्लिसिटी स्टंट कहल गेल।हमर विचारें व्यंग करय बला सब सेहो मिथिला,मैथिली,देश एवं विश्वके शुभचिंतक छथि,मुदा अहि मुद्दा पर दृष्टिकोण अलग छन्हि।

    यदि सदभावसँ विचार कयल जाय त' इ प्रयास सब सकारात्मक बुझायत नहि त' जे करब ओकर विरूद्ध किछु ने किछु तर्क रहबे करत। जेना बाढ़ि पर किछु कहब त' कहल जा सकैत अछि हिनका गरीबी ,बेरोजगारी आदि समस्या नहि सुझलन्हि आइ बाढ़ि सुझैत छन्हि अथवा कविता, कथा,लेख लिख क' इ समस्याक समाधान तकैत छथि?

    हमर कहबाक तात्पर्य हम सब समस्याक समाधान हेतु कयल गेल कोनो प्रयासके सराहना करी तथा समय अनुसार समाधनक उपाय सुझाबी।
                               ✍👤डा. अखिलेश झा

0 टिप्पणियाँ Blogger 0 Facebook

 
Apanmithilaa.com © 2016.All Rights Reserved.

Founder: Ashok Kumar Sahani

Top