मिथिला वर्णन ( नवगीत ) 


✍👤शिव कुमार झा टिल्लू 
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सीता सन बेटी हमराघर मायक ह'म पुजारी छी 
अभ्यागत'केँ हिय'सँ स्वागत बरू हम दीन'भिखारी छी !
सरस्वती'सँ ज्ञान मँगै छी रखबै विद्या - मान औ
याचन बेरि'मे रूप अयाची उदयन सन संतान औ
कमला कातमे दीप जड़ा'क' गंगा - कोर निहारै छी 
हे कोकिल पुनि मिथिला अबियौ जल'सँ सगुन उचारै छी 
सदाचार सिखलहुँ विदेह'सँ संजोगल आचारी छी 
अभ्यागत'केँ हिय'सँ स्वागत बरू हम दीन'भिखारी छी !
पाहुन रघुवर मिथिघर एलथि परसल पायस मखान औ
छप्पन भोग'सँ स्वागत करियौन फेर खुअबियौन पान औ
खोईंछ भरै छथि माय भारती सिया आँखि'मे नोर हे 
ओ बिसरल दिन कहिया घुरतै मिथिला हेरथि इजोर हे 
उपहासे'टा भेंटल तंत्र'सँ की एकरे अधिकारी छी 
अभ्यागत'केँ हिय'सँ स्वागत बरू हम दीन'भिखारी छी !
हे सलहेस अहाँ पुनि अबियौ देखू सूतल यौवन औ
मायक उर नहि बसथि मैथिली कोना सीखत नव नौतन औ
अपने'मे लड़ि-लड़ि क' हम सभ थाकल एक विजेता छी 
दोसर लग नहि बोल फुरै अछि अपने घर अधिवेत्ता छी 
एक्को सूप'ने देत मुदा अजबारने पैघ बखारी छी 
अभ्यागत'केँ हिय'सँ स्वागत बरू हम दीन'भिखारी छी !

✍👤 शिव कुमार झा "टिल्लू"

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