हे शिव गरल भरल एहि जगमे !


✍👤 शिव कुमार झा टिल्लू 
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हे शिव गरल भरल एहि जगमे !
अमरित पानक आहिमे मानव 
विख संयोगल रगमे........ 
कोनो डगरि दिशि ध्यान धरी त' 
काँट भेंटय पग पग मे
थाकि हारि क' पड़लहुँ घ'र मे
चिंतन पड़ल अलग मे........
उचरल छल जे सुलभ सकारथ 
कत' ओ कर्म सुभग मे
पीड़क नव अनुभूति हेरै छी 
झड़कल पाँखि- विहग मे...... 
सर्जक पालक संग उद्धारक 
सूतल अलग थलग मे 
ई अजगुत क्षण रहत कखन धरि
सत आँखि नोर विलग मे...... 
नीति रीति सभ हकन्न कनै अछि
काम बिकैछ महग मे
कत' कत' नीलकंठ कहायब 
तृष्णा पैसल  जग मे.......

✍👤शिव कुमार झा 'टिल्लू'

कबि- शिव कुमार झा 'टिल्लू' जी

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