तोहर निर्णय कौडी भावमे बेचि देबौ रे



✍👤सुनील कुमार मल्लिक

बत्तीस दाँतक जीहतर सँ घीच लेबौ रे ।
हम जनता छी चुट्टी जकाँ पीच देबौ रे ।

रजनेतीके गुणा भागके खेल खेलै छें?
सभ धुरफन्दी धोबियापाट सँ खीच लेबौ रे ।

पुस्तऔं पुस्तसँ दमनक ढेरो कथा बनेलें ।
ओहि भाइरसके नस्लके आब थकुचि देबौ रे ।

लेमनचुसक लोभ देखा मलाइ पबै छें ।
ओहि मलाइ पर मिथिलावासी थुकि देबौ रे ।

घरके अभिभावक बनवाक जे ढोंग करैछें ।
तोहर निर्णय कौडी भावमे बेचि देबौ रे ।

जँ ऋषिमनसँ संविधानके बनेलें दर्पण 
सभक्यो मुँह निहारि निहारि विहुँसि जेबौ रे ।



कबि - अनिल कुमार मल्लिक जी
.✍सुनील कुमार मल्लिक

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