धूमधामसँ   पूजब  चौठी-चाँन हे



गीतकार✍👤विद्यानन्द वेदर्दी


उगऽ  झट्ट दऽ  जुड़ाबऽ  जान हे
धूमधामसँ   पूजब  चौठी-चाँन हे

चिकनि  माटिसँ  सभतरि निपलहुँ
पिठारक अनेक अरिपन लिखलहुँ
चमचम  चमकै  अंगना-दलान हे
उगऽ  झट्ट दऽ  जुड़ाबऽ  जान हे
धूमधामसँ   पूजब  .  .  .

खिर-पुड़ी- दही-केरा, व्यञ्जनसँ
मड़र   सजौने  छी खूब जतनसँ
चढौने  पान, सुपाड़ी, मखान हे
उगऽ  झट्ट दऽ  जुड़ाबऽ जान हे
धूमधामसँ   पूजब  .  .  .

कल जोड़िके भण्डारा लगायब
कलस लकऽ हाथ हम उठायब
जीबथि-जागथि मोरा सन्तान हे
उगऽ  झट्ट दऽ  जुड़ाबऽ जान हे
धूमधामसँ   पूजब  .  .  .
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© विद्यानन्द वेदर्दी
२०७४/०५/०९
बनौली,प्रशवनी (सप्तरी)

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