(((💐💐💐💐अंतर्नाद💐💐💐💐)))


लेखक ✍ स्व. सुबोध शरद 
************* ************
अम्बे!अहाँक दरशन लेल मन अछि व्याकुल।।
जिनगी तरि विपुल उमंग पाओल दुःख सुख संग।
उन्नति देखल विपत्ति देखल नव नव भावक रंग।
एकहीं वांछा हृदय बीचि अमित अतूल।।
अम्बे!अहाँक दरशन लेल मन अछि व्याकुल।।
प्राण देलौं भाव देलौं अहीं देलौं बुद्धि विचार।
नयन देलौं दरस देलौं अहीं देलौं प्रकृतिक सार।
अन्तः मनक उद्गार प्रार्थित भावना विपुल।।
अम्बे!अहाँक दरशन लेल मन अछि व्याकुल।।
हठ बूझु एक बालक के आ उत्कंठक आवेग।
मन तृष्णा तृप्त कौना बिन भेटल समुचित नेग।
हृदयक राखू मान माते दि'अ फल समतूल।।
अम्बे!अहाँक दरशन लेल मन अछि व्याकुल।।
जँ कर्म अनुचित हम्मर!नीको कर्म तअ कयलौं।
अधर्म पथक पथिन जँ तँ कनीओ धर्म निभेलौं।
जै छी जेना छी हम अहीँक अँचरक फूल।।
अम्बे!अहाँक दरशन लेल मन अछि व्याकुल।।
उचित कर्तव्य नियति बदलै बिधिक विधान।
सत कहै सुबोध सावित्री पुनः पाओल सत्यवान।
हृदयक शरद श्रद्धा भावना नै निर्मूल।।
अम्बे!अहाँक दरशन लेल मन अछि व्याकुल।।
लेखक ✍ स्व. सुबोध शरद
डखराम।।

0 टिप्पणियाँ Blogger 0 Facebook

 
Apanmithilaa.com © 2016.All Rights Reserved.

Founder: Ashok Kumar Sahani

Top