गोसाओनिक गीत ---

आँखि ने मुनियौ सुत दिस तकियौ,
                  दियौ कनियो ध्यान ।
          मा यै बेकल अछि संतान ।।

आस निरासक नुक्का-चोरी ।
हाथ छै छूछ आ खाली झोरी ।।
पसरल गुज राइत अन्हरिया, हेतै कखन विहान ।
                           मा यै बेकल अछि संतान ।।

तीख बड़ रौद छै हमरे बखरा।
ममता भरल आँचरकेँ असरा ।।
कोर लिय' हे जगजननी, हमहुँ नहि छी आन ।
                       मा यै बेकल अछि संतान ।।

रक्तबीज फेर सोहरल जाइ छै ।
शुम्भ-निशुम्भ ढेंगरल जाइ छै ।।
महिषोसुर अतातायी नम्हर ,ढहि गेलै सभ गुमान ।
                             मा यै बेकल अछि संतान ।।

~>  मैथिल प्रशान्त
   दुर्गौली, बेनीपट्टी ।


कबि- मैथिल प्रशान्त जी

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